खड़ाऊ का धर्म से ही नहीं सेहत से भी है नाता, जानें कैसे ?


खड़ाऊ यानि लकड़ी की चप्पल का चलन हमारे वैदिक काल से चला आ रहा है। साधु- संत आज भी खड़ाऊ पहनते हैं। धार्मिक ग्रंथों में लकड़ी की चप्पलों का उल्लेख किया गया है। खड़ाऊ पहनने के पीछे की मान्यता धार्मिक होने के साथ-साथ वैज्ञानिक भी है। यजुर्वेद में बताया गया है कि खड़ाऊ पहनने से कई बीमारियों से हमारी रक्षा होती है। आइए जानते हैं हमारे ऋषि-मुनि क्यों पहनते थे खड़ाऊ…
1– गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांत के अनुसार पृथ्वी हर एक चीज को अपनी ओर खींचती है। ऐसे में हमारे शरीर से निकलने वाली विद्युत तरंगें जमीन में चली जाती हैं। इन तरंगों को बचाने के लिए खड़ाऊ पहनने की व्यवस्था की गई।
2– खड़ाऊ पहनने से तलवे की मांसपेशियां मजबूत बनती हैं।
3– खड़ाऊ पहनने से शरीर का संतुलन सही रहता है जिसकी वजह से रीढ़ की हड्डी पर इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
4– पैरों में लकड़ी की पदुका पहनने से शरीर में रक्त का प्रवाह सही रहता है। साथ ही शरीर में सकारात्मक ऊर्जा विकसित होती रहती है।

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